Tuesday, June 23, 2009

'ज़म्हुरियत' shabd ,एक अबूझ पहेली की तरह होता जा रहा है। दुनिया के इतिहास में दर्ज बड़े -२ संघर्षों का गहरा सम्बन्ध है ,इस शब्द से। ज़म्हुरियत को सबसे आधुनिक अवधारणा के बतौर पहचान मिली.लेकिन आज 21vi शदी में यह शब्द अपने अर्थ में बदलाव का साक्षी स्वं बनता जा रहा है.ज़म्हुरियत के खिलाफत करने वाली ताकतें/ विचारधाराएँ भी अपने घटिया स्वार्थों को हासिल करने के लिए इस ज़म्हुरियत का सहारा लेने में कोई संकोच नही करती। उदहारण के बतौर आप अमेरिका को ही लें.आप पाएंगे की मानवीय अधिकारों,देशों की संप्रभुता और अस्मिता पर सबसे ज्वादा हमले इसने उक्त लोकतान्त्रिक मूल्यों के हिफाज़त के नाम पर किए। अफगानिस्तान ,इराक, इरान, उगोस्लविया पर हमले भला कौन भूल सकेगा।भूख ,दवा, पानी के abhav में तड़पते इराकी बच्चों का करुण क्रंदन से वहां की घाटी आज भी शिशक रही है। गुजरात नरसंहार के दोषी ज़म्हुरियत की चादर lpetker आज हुकूमत कर रहे है। मारे गये लोगो का परिवार आज भी न्याय के लिए भटक रहा है।

prashn uthta है की sacchi लोकतंत्र की हिफाज़त krne वाले लोग आज rajnitiki के rangmanch से एक के bad एक krke क्यों विदा होते जा रहे हैं.kehan गये vo लोग jinke upr ज़म्हुरियत के sacche mayne को samjhane की jimmedari इतिहास ने saupa है। ydi समय rhte वे अपनी bhumika nibhane के लिए आगे नही आए .......

........to शायद vartman में ghumad रहे ये kale badal इस manav सभ्यता के भविष्य को syah करने से बाज नही aayenge। आने वाली pidiyan आज के समय को ही jamhuriyat का paimana मन ले to कोई aashchrya नही होना चाहिए .

1 comment:

  1. आपकी जम्हूरियत को लाल सलाम. उम्मीद है की ब्लॉग की अगंभीर दुनिया को आप गंभीर और सार्थक बनांएगे.

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